बच्चों में डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी होना एक गंभीर समस्या होती है। यह समस्या खासकर छोटे बच्चों और शिशुओं में जल्दी होती है। क्योंकि उनके शरीर में पानी की मात्रा कम होती है और वह जल्दी डिहाइड्रेट होते हैं। उल्टी, दस्त, बुखार, ज्यादा पसीना या पर्याप्त पानी न पीने से बच्चों में डिहाइड्रेशन होता है। समय पर पहचान और सही इलाज से बच्चों को गंभीर स्थिति से बचाया जाता है। Gastrologist in noida में उपलब्ध है। नोएडा में बच्चों में डिहाइड्रेशन Dehydration in Children in Noida), उल्टी-दस्त और पानी की कमी के इलाज के लिए अनुभवी बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।
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बच्चों में डिहाइड्रेशन क्या है? (What is Dehydration in Children)
जब बच्चे के शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे सोडियम और पोटैशियम) अधिक मात्रा में निकल जाते हैं और उनकी समय पर पूर्ति नहीं हो पाती, तब डिहाइड्रेशन की स्थिति बनती है। यह समस्या आमतौर पर बार-बार दस्त (Diarrhea), उल्टी, तेज बुखार, अधिक पसीना आने या पर्याप्त पानी व तरल पदार्थ न पीने के कारण होती है। शिशुओं और छोटे बच्चों में यह स्थिति जल्दी गंभीर रूप लेती है। इसलिए इसके लक्षणों की समय पर पहचान और तुरंत उपचार बेहद जरूरी होता है।
बच्चों में डिहाइड्रेशन क्यों होता है? (Causes of Dehydration in Children)
बच्चों में पानी की कमी कई कारणों से होती है, जैसे:
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दस्त और उल्टी
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वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण
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तेज बुखार (Fever)
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बहुत ज्यादा पसीना आना
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पर्याप्त पानी या दूध न पीना
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गर्म मौसम या गर्म वातावरण
छोटे बच्चों में शरीर का मेटाबॉलिज्म (Metabolism) तेज होने के कारण पानी की कमी जल्दी होती है।
बच्चों में डिहाइड्रेशन के लक्षण (Symptoms of Dehydration in Children)
बच्चों में पानी की कमी होने पर निम्न लक्षण दिखाई देते हैं। यदि इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
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मुंह और होंठ सूखना (Dry lips)
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कम पेशाब आना
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पेशाब का रंग गहरा होना
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बच्चा सुस्त या कमजोर दिखना
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आंखें धंसी हुई लगनारोते समय आंसू न आना
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त्वचा (skin) का सूखापन
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चक्कर आना या चिड़चिड़ापन
बच्चों में हल्का, मध्यम और गंभीर डिहाइड्रेशन (Stages of Dehydration in Children)
डिहाइड्रेशन तब होता है। जब बच्चे के शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स जरूरत से ज्यादा मात्रा में निकलते हैं। उनकी पूर्ति नहीं हो पाती। बच्चों में यह समस्या जल्दी बढ़ सकती है। इसलिए इसके अलग-अलग चरणों को समझना बहुत जरूरी है। आमतौर पर डिहाइड्रेशन (Dehydration) को तीन स्तरों में बांटा जाता है। हल्का, मध्यम और गंभीर।
हल्का डिहाइड्रेशनः
इस स्थिति में शरीर में पानी की कमी बहुत ज्यादा नहीं होती है। लेकिन इसके शुरुआती संकेत दिखाई देते हैं। बच्चे को हल्की प्यास लगना शुरू होती है। मुंह या होंठ सूखे महसूस होते हैं। बच्चा सामान्य रूप से खेलता-कूदता और गतिविधियां करता रहता है। इसलिए कई बार माता-पिता इस स्थिति को गंभीरता से नहीं लेते। हालांकि यह डिहाइड्रेशन का शुरुआती चरण होता है। इसलिए इस समय बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस घोल ORS Solution), नारियल पानी या अन्य तरल पदार्थ देना जरूरी होता है ताकि स्थिति आगे न बढ़े।
मध्यम डिहाइड्रेशनः
जब शरीर में पानी की कमी बढ़ती है। तब मध्यम डिहाइड्रेशन की स्थिति बनती है। इस अवस्था में बच्चे को कम पेशाब आना शुरू होता है। शरीर में कमजोरी महसूस होती है। बच्चा सुस्त और थका-थका दिखाई देता है। उसकी आंखें थोड़ी धंसी हुई लगती हैं। कई बार त्वचा भी सूखी लगती है। बच्चा सामान्य से कम सक्रिय होता है। इस अवस्था में बच्चे को तुरंत तरल पदार्थ देना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी होता है। जिससे डिहाइड्रेशन गंभीर रूप न ले।
गंभीर डिहाइड्रेशन-
यह डिहाइड्रेशन का सबसे खतरनाक चरण होता है। इसमें बच्चे की जान को भी खतरा होता है। इस स्थिति में बच्चे को बहुत कम या बिल्कुल पेशाब नहीं आता, शरीर में तेज कमजोरी होती है। सांस तेज चलने लगती है। बच्चा अत्यधिक सुस्त हो सकता है, बेहोशी जैसी स्थिति होती है। भ्रम की अवस्था भी दिखाई देती है। होंठ और त्वचा बहुत ज्यादा सूखी हो सकती है तथा आंखें गहराई तक धंसी हुई दिखती हैं। गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति में तुरंत बच्चे को नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे मामलों में अक्सर डॉक्टर द्वारा नस के माध्यम से तरल पदार्थ देना पड़ता है। समय पर इलाज मिलने से बच्चे की स्थिति जल्दी सुधर सकती है और गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव होता है।
बच्चों में पानी की कमी कैसे पहचानें (How to Identify Dehydration in Children)
डॉक्टर बच्चों में डिहाइड्रेशन की पहचान निम्न बातों से करते हैं:
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बच्चे के लक्षण
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शारीरिक जांच
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पेशाब की मात्रा
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त्वचा की नमी
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शरीर के वजन में कमी
कभी-कभी जांच भी कराई जाती है।
बच्चों में डिहाइड्रेशन के लिए कौन-कौन से टेस्ट होते हैं (Tests for Dehydration in Children)
जब बच्चे में डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखते हैं। तो डॉक्टर सबसे पहले शारीरिक जांच करके उसकी स्थिति का आकलन करते हैं। यदि लक्षण ज्यादा गंभीर हों या लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर कुछ लैब टेस्ट lab test) कराने की सलाह देते हैं। इन जांचों की मदद से यह पता लगाया जाता है कि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी कितनी है और डिहाइड्रेशन का असली कारण क्या है।
ब्लड टेस्ट-
ब्लड टेस्ट के माध्यम से शरीर में मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम, पोटैशियम (Potassium), क्लोराइड (Chloride)आदि के स्तर की जांच की जाती है। डिहाइड्रेशन होने पर इन तत्वों का संतुलन बिगड़ता है। जिससे शरीर की कई महत्वपूर्ण क्रियाएं प्रभावित होती हैं। ब्लड टेस्ट से यह भी पता चलता है कि शरीर में पानी की कमी कितनी ज्यादा है और क्या बच्चे को तुरंत तरल पदार्थ या दवाओं की जरूरत है।
यूरिन टेस्ट-
यूरिन टेस्ट Urine Test) से यह पता लगाया जाता है कि शरीर में पानी की मात्रा पर्याप्त है या नहीं। अगर बच्चे के शरीर में पानी की कमी होती है, तो पेशाब का रंग गहरा हो सकता है और उसकी मात्रा भी कम होती है। इस जांच के जरिए किडनी की कार्यक्षमता (Kidney Function) और शरीर के हाइड्रेशन स्तर का अंदाजा लगाया जाता है।
सीबीसी-
सीबीसी टेस्ट (CBC Test) खून की सामान्य जांच होती है। जिससे शरीर में किसी संक्रमण (इन्फेक्शन) की संभावना का पता लगाया जाता है। कई बार बच्चों में दस्त, उल्टी या बुखार किसी बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण के कारण होता है, जिससे डिहाइड्रेशन की स्थिति बन जाती है। सीबीसी रिपोर्ट से डॉक्टर यह समझ पाते हैं कि बच्चे के शरीर में संक्रमण है या नहीं और उसी के अनुसार इलाज की योजना बनाई जाती है।
बच्चों में डिहाइड्रेशन का इलाज (Treatment of Dehydration in Children)
डिहाइड्रेशन का इलाज Treatment for Dehydration) उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। यदि समय रहते सही उपचार शुरू कर दिया जाए तो ज्यादातर बच्चे जल्दी ठीक होते हैं। उपचार का मुख्य उद्देश्य शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करना और डिहाइड्रेशन के मूल कारण जैसे दस्त, उल्टी (Vomit) या बुखार को नियंत्रित करना होता है।
हल्के डिहाइड्रेशन का इलाज-
हल्के डिहाइड्रेशन की स्थिति में आमतौर पर बच्चे का इलाज घर पर ही किया जा सकता है। इस अवस्था में शरीर में पानी की कमी ज्यादा नहीं होती, इसलिए बच्चे को अधिक मात्रा में तरल पदार्थ देना सबसे महत्वपूर्ण होता है।
ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस)–
ओआरएस शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को जल्दी पूरा करने में मदद करता है। इसे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार देना चाहिए।
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पर्याप्त पानी– बच्चे को दिन भर में पर्याप्त मात्रा में साफ पानी पिलाना जरूरी है।
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नारियल पानी– नारियल पानी प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स का अच्छा स्रोत है और शरीर को जल्दी हाइड्रेट करने में मदद करता है।
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सूप और तरल आहार– दाल का पानी, सब्जियों का सूप, चावल का माड़ जैसे हल्के और तरल आहार भी शरीर में तरल की कमी को पूरा करने में सहायक होते हैं। यदि बच्चे को हल्के डिहाइड्रेशन के साथ दस्त या उल्टी हो रही हो तो उसे आराम देने के साथ-साथ तरल पदार्थ नियमित रूप से देना जरूरी होता है।
मध्यम डिहाइड्रेशन का इलाज-
जब शरीर में पानी की कमी बढ़ जाती है, तब मध्यम डिहाइड्रेशन की स्थिति बनती है। ऐसे मामलों में बच्चे को अधिक सावधानी और डॉक्टर की निगरानी की जरूरत होती है।
ओआरएस का नियमित सेवन–
डॉक्टर की सलाह के अनुसार बच्चे को नियमित अंतराल पर ओआरएस देना जरूरी होता है ताकि शरीर में तरल और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहे।
डॉक्टर की निगरानी–
इस अवस्था में बच्चे की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होता है ताकि यदि हालत बिगड़े तो तुरंत इलाज किया जा सके।
उल्टी और दस्त की दवा–
यदि डिहाइड्रेशन का कारण उल्टी या दस्त है, तो डॉक्टर इसके लिए उपयुक्त दवाएं देते हैं ताकि तरल की और अधिक कमी न हो। इस चरण में सही समय पर इलाज मिलने से डिहाइड्रेशन को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
गंभीर डिहाइड्रेशन का इलाज-
गंभीर डिहाइड्रेशन एक आपात स्थिति होती है और इसमें तुरंत अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ती है। इस अवस्था में बच्चे का शरीर काफी कमजोर हो सकता है और घर पर इलाज पर्याप्त नहीं होता।
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अस्पताल में भर्ती– बच्चे को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराकर चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में रखा जाता है।
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आईवी फ्लूइड (ड्रिप)– शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को जल्दी पूरा करने के लिए नस के माध्यम से तरल पदार्थ (IV Fluids) दिए जाते हैं।
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लगातार निगरानी– डॉक्टर और नर्स बच्चे की सांस, दिल की धड़कन, पेशाब की मात्रा और अन्य महत्वपूर्ण संकेतों की लगातार निगरानी करते हैं। यदि समय पर सही उपचार मिल जाए तो गंभीर डिहाइड्रेशन से भी बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता है। समय पर पहचान और उचित इलाज से ज्यादातर बच्चे जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं और किसी गंभीर जटिलता से बचाव संभव होता है।
बच्चों में पानी की कमी कैसे दूर करें (How to Prevent and Treat Dehydration at Home)
उल्टी या दस्त ज्यादा होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। बच्चों में पानी की कमी दूर करने के लिए:
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ओआरएस घोल दें
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नारियल पानी दें
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हल्का भोजन दें
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फल और जूस दें
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बार-बार थोड़ा-थोड़ा पानी दें
डिहाइड्रेशन से बच्चों को कैसे बचाएं (How to Prevent Dehydration in Children)
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बच्चों को पर्याप्त पानी पिलाएं
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साफ और पौष्टिक भोजन दें
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हाथ धोने की आदत डालें
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दस्त-उल्टी होने पर तुरंत ओआरएस दें
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गर्म मौसम में तरल पदार्थ बढ़ाएं
किस डॉक्टर से संपर्क करें (Which Doctor Should You Consult)
बच्चों में डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई देने पर सबसे पहले पीडियाट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) से संपर्क करना चाहिए। यदि बच्चे को बार-बार उल्टी, तेज दस्त, सुस्ती, कम पेशाब या तेज बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। फूड पॉइजनिंग का इलाज नोएडा में उलब्ध है। नोएडा में अनुभवी बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician in Noida) बच्चों में डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और संक्रमण का सही इलाज उपलब्ध कराते हैं।
नोएडा में बच्चों के विशेषज्ञ डॉक्टर से अपॉइंटमेंट: +91 9667064100
निष्कर्ष (Conclusion)
बच्चों में डिहाइड्रेशन एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या बनती है। समय पर लक्षण पहचानना और सही इलाज शुरू करना बहुत जरूरी है। माता-पिता को बच्चों के पानी पीने की मात्रा, पेशाब (Urine) और व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए। सही समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। इससे नुकसान होता है।
Source Url: https://www.felixhospital.com/blogs/bachchon-me-dehydration-ke-lakshan-noida-ilaj




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